Feziya khan

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धीरे धीरे से भाग --- 5




दीप्ती भी खिड़की वाली सीट पर बैठी थी और वो उसके ठीक आगे वाली सीट पर, दीप्ती को सफर के समय हवा से बाते करना पसंद था वो बाहर के नज़ारे मे खो जाती थी ज़ब तेज हवाए उसके बालो को उड़ाती तो उसे अच्छा लगता था उनकी छुआन को वो अंदर तक महसूस करती थी उन के अहसास को अपने अंदर ही छुपा लेना चाहती थी कुदरत की बनाई हुई प्राकृतिक को वो अपनी आँखो मे कैद कर लेना चाहती थी ज़ब यहाँ से जाऊ तो इनकी सुन्दर याद मन मे समेट कर अपने जीवन मे ज़िन्दगी भर रख सके,,,,,

वो तो खुद मे ही खोई हुई थी इसलिए उसे पता भी नहीं चल की कब उस लड़के ने आगे का मिर्रर उसकी तरफ कर के ना जाने कब से उसे देखे जा रहा था!



ज़ब उसको नज़र अचानक से उस मिर्रर पर पड़ी तब उसे इस बात का एहसास हुआ की वो वो उसे देख रहा था और देख देख कर मुस्कुरा रहा था मैंने बड़ी बड़ी आँखे कर के उसे देखा तो उस ने उसे आँख मर दी और हँसने लगा उस के ऐसा करने से वो झेप सी गयी,,,,,

ऐसा नहीं था की दीप्ती उससे या किसी भी लड़के से डरती थी उसे ऐसे लोगो को ठीक करना और उन्हें ऐसा करने पर क्या सजा देनी है ये अच्छे से जानती थी आज तक घर मे या स्कुल मे कोई भी उसके साथ ऐसा करने की सोच भी नहीं सकता था,,,,,,


सब को पता था ये ना खुद पटती है और ना ही किसी और को पटाने देती है मै ऐसे लोगो से बात करना भी पसंद नहीं करती थी जो लड़कियी को टाइम पास समझते थे ऐसो का तो मुँह तोड़ कर हाथ मे दे देती थी वो,,,,,

क्यों की उसकी नज़र मे ये प्यार एक धोखे का नाम है ये एक ऐसा मीठा जहर है जो असर तो तेजी से करता है पर इस का ज़ब खुमार उतरता है तो ज़िन्दगी भर का गम दे जाता है इसलिए जितना होता वो इससे दूर रहती और अपने दोस्तों को भी रखती,,,,,,


पर यहाँ मन मर के रह गयी क्यों की यहाँ वो अपने अंकल की वजह से आई थी तो चाहती नहीं थी की उसकी वजह से उनका सर नीचे हो ये दुनिया है सबूत मांगती है और इस बात का क्या सबूत देती की उसने क्या किया है और एक मौका नहीं छोड़ता था अपनी उल्लू जैसी आँखो से उसे देखने का,,,

माँ कसम खून के घुट पी कर रह गयी थी दीप्ती मन मे बोली, बेटा खैर मना आज तू अपनी की इतना करने पर भी तू मेरे सामने खड़ा है अगर बेटा मेरे यहाँ होता और तूने ऐसी हरकत की होती तो बताती की तेरा क्या हाल होता ये तो मै खुद भी नहीं जानती पर ज़िन्दगी मे किसी और को देखने पर सौ बार सोचता तू,,,,,,


उस के बाद उसने भी अपनी गिद्ध जैसी नज़र उस पर जमाई रही की अब देख बेटा तेरी वही आँखे फोड़ कर रख दूंगी,,,,,


ज़ब भी वो देखने की कोशिस करता मेरी गुस्से भारी आँखे देख कर दूसरी और देखने लगता, फिर तो उसकी हिम्मत ही नहीं हुई की उसे देखे दीप्ती भी मन ही मन मुस्काई अब देख तू और क्या क्या होता है तेरी और मेरी इस कोल्ड वार मे,,,,,


दो दिन तो वो दीप्ती के आस पास भी नहीं फटाका कही उसे उसकी नज़रो का सामना ना करना पड़े शायद उसके अरमानों पर पानी, नहीं पानी नही दरिया मे ही डाल दिया था,,,,,


शाम का मौसम बहुत ही खुशनुमा था ठंडी ठंडी हवा चल रही थी दीप्ती छत पर बैठे हुए अपने फेवरेट गाने गुनगुनाते हुए इधर उधर घूमे जा रही थी मेघना भी ऊपर आ गयी दोनों बाते कर रही थे तो उसका भाई आ गया फिर छोटी बहन भी आ गयी वो सब बाते करने लगे वो लोग भी उस से बाते कर रहे थे, मेघना के भाई सोहम ने बोला चलो कोई गेम खेलते है हम सब ने हामी भर दी क्या खेलना है,,

 सोहम ने बोला, मै तुम को एक शब्द दूंगा तुम्हे उससे मिलता जुलता शब्द बताना है और जो अक्षर आएगा लास्ट का उससे दूसरे को शब्द बनाना है,,,,,,,


अभी हम खेल ही रहे थे की सोहम को आवाज़ लगता हुआ उसका बड़ा भाई आ गया,,,,

वो बोला तुम सब यहाँ हो मै तुन्हे नीचे देख रहा था,,,,,


सोहम बोला, भाई हम सब खेल रहे थे कोई जरुरी काम है तो बताओ,,,,,

वो बोला,, नहीं ऐसे ही बस

सोहम बोला, तो भाई आओ ना आप भी हमारे साथ खेलो,,,


ज़ब दीप्ती ने देखा की वो भी खेलने के लिए तैयार है तो वो बहाना बना कर उठने लगी तो सोहम ने उसे रोक लिया इतना मजा आ रहा है कहा जा रही हो रुक जाओ ऐसे बीच मे गेम छोड़ कर नहीं जाते है,,,,,

वो बोला, जाने दे सोहम कुछ लोगो को हारना पसंद नहीं होता ज़ब उन्हें पता हो की सामने वाला कोई कच्चा खिलाडी नहीं है,,,,,

ये सुन कर दीप्ती रुक गयी और अपनी ऊँगली उस को दिखाते हुए बोली, ओह मिस्टर हारने से मै डरती नहीं हूँ और कोई मुझे हरा दे वो अभी पैदा नहीं हुआ है,,,,,,


वो बोला, अच्छा तो खेल मे साबित करो जो बोल रही हो,,,,,

दीप्ती भी तेश मे आ गयी और बैठ गयी उसके सामने उस की आँखो मे आँखे डाल कर अभी पता नहीं बेटा तुम्हे की तुम्हारा किस्से पाला पड़ा है,,,,,



दीप्ती तब तक उस को बर्दाश्त कर पाती या फिर दोनों की बीच एक नई कहानी का आगाज़ होगा ये सब तो आप को अगले भाग मे पता चलेगा,,,,



क्रमशः




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3 Comments

madhura

16-Aug-2023 09:20 PM

Nice story

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Babita patel

16-Aug-2023 04:43 PM

Nice

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Abhilasha Deshpande

16-Aug-2023 12:45 PM

Nice

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